Friday, August 31, 2012

मुकेश,रफ़ी और किशोर के अलावा

एक दौर था जब bollywod में तीन खान नहीं थे, पर तीन इसे शक्स थे जिनके बिना किसी भी हिट फिल्म की कल्पना नहीं की जा सकती थी ...
मुकेश, रफ़ी और किशोर ...
पर उस समय कई ऐसे लोग भी हुए है जिन्होंने अपनी बेहतरीन आवाज़ से फ़िल्मी दुनिया को रोशन किया है।
कुछ एक जो मुझे ध्यान है हेमंत कुमार,महेंद्र कपूर ,शमशाद बेगम,तलत महबूब और भी बहुत है।
आज  जिसके गाने पेश है वो है महेंद्र कपूर इनके अधिकतर गाने आपको मनोज कुमार की movies के कारण याद होगे। पूरब और पश्चिम ....हा हा इस मूवी के गाने से एक याद जुडी हुवी है, वो किसी और दिन आज कुछ और गाने महेंद्र कपूर की आवाज में







और एक बात R.D. barman के पिताजी S.D. Barman एक अच्छे कोम्पोसर के साथ साथ एक अच्छे गायक भी थे , किसी दिन उनकी बात की जायेगी।

अब जाते जाते एक गाना रफ़ी की आवाज में भी, एवेही



  

Monday, August 27, 2012

कुछ पसंदीदा गीत

कुछ पसंदीदा गीत आपके नज़र पेश है।

1. आजा पिया तोहे प्यार दू ....



 2. बाहों में चले आओ , हमसे सनम क्या पर्दा ...


 3. सजना है मुझे सजना के लिए ....


 4. लग जा गले की फिर ये हसीन रात हो ना हो...



5. तुम पुकार लो...

Saturday, August 25, 2012

मौत से पहले, और मौत के बाद

अभी एक मूवी देख रहा था, ॐ शांति ॐ ...
अच्छी मसाला मूवी है, फुल टाइम पास ।
उसमे एक सीन है जब दीपिका जल के मर रही होती है, ठीक उसी टाइम शाहरुख़ भी मर रहा होता है, उसे कोई प्रोदुसर बचाने की कोशिश करता है, और हॉस्पिटल के बेड  पे मरते हुए उसे अपनी जिन्दगी के सबसे हसीन लम्हे  याद आते है।
असल में क्या होता होगा जब कोई मरता है तो ??
मै नास्तिक हूँ, तो  ये तो  नहीं मानता की कोई सातवे आसमान से आता है और आपसे आपकी जिन्दगी के पाप- पुण्य के हिसाब किताब मांगता है, पर ये जरूर लगता है की उस टाइम आपको  अपनी लाइफ के सबसे हसीन लम्हे याद आते होगे, कितने होते है ??
इतने ही की 5-7 मिनट में पुरे rewind कर सके, सोच के देखिये आपकी लाइफ में कितने इसे लहमे है जो आपको लगता है की आपकी मौत के दौरान आपको याद आयेगे ???
मौत का अहसास हुआ है कभी ?? ये ऐसी चीज है जो होनी है और पूरी जिन्दगी हम इसी के होने के इंतज़ार में गुज़ार देते है।
याद कीजिये यदि आप 20-30 साल के है तो sure एक ना एक बार ये अहसाह जरुर हुआ होगा, मै 27 साल का हूँ  और मुझे ये अहसाह 2 बार हुआ है, एक बार जब हमारे यहाँ engineering collage खुला  था और हम उसकी सेरेमनी  से लौट रहे थे, मई स्कूटर  के पीछे बैठा हुआ था, वो एक highway था और स्कूटर स्लिप हो गया, ये इतनी बड़ी बात नहीं है पर पीछे से एक बस आ रही थी और वो बस मुझसे कुछ पहले ही रुक गयी, उस टाइम मई 15-16 साल का था। इसलिए याद नहीं उस टाइम मुझे क्या अहसाह हुआ था।

दूसरा वाकया अभी एक साल पहले ही हुआ है, मुझे cyst हुआ था और मै ऑपरेशन थेरेअते की टेबल पे था, मई पुरे होश में था, और डर इतना लग  रहा था की जेसे अभी जान निकली जाती है , मुझे अछे से याद है डोक्टर के आने से पहले मुझे इतना ही डर लग रहा था, पर जेसे ही lights ओंन  हुई, मुझे अपनी जिन्दगी के वो लम्हे याद आने लगे जो शायद मुझे मेरी मौत पर याद आयेगे... और वो इतने थोड़े है, की यकीं नहीं होता की इतनी लम्बी जिन्दगी में बस मेने इतना सा ही कमाया है...
अब सोचने की बात है की अभी हमारी लाइफ तकरीबन 50-60 साल कि होती है, तो इतनी लाइफ में मेने कितना जीया ???
बस 10-15 मिनट ?? या 3-4 घंटे या  ज्यादा  से ज्यादा 1 दिन....
अब आगे की जिन्दगी उसी टाइम को ज्यादा  से ज्यादा बढ़ाने में गुजरना चाहता हु.....
देखते है अपनी कोशिश में कहा तक सफल होते है, बाकी तो उसी दिन पता चलेगा जिस दिन ये जंहा छोरके जायेगे।



Friday, August 24, 2012

हँसते ज़ख्म

बड़े दिनों बाद एक गाना याद आया, यु ही बैठे बैठे
गौर कीजियेगा ...

वेसे इसे गाने सुनने नहीं चाहिए , पर्सनली  लगता है, हम जेसे गाने सुनते है, धीरे धीरे खुद भी वेसे ही हो जाते है। जेसे कोई बहुत ग़ज़ल सुनेगा तो बहुत संजीदा हो जायेगा।
और कोई पोप या चलताऊ गाने सुनेगा तो मस्त मौला टाइप से रहेगा,
खेर  मुद्दे पे आते है है , तो जनाब ये गाना याद आया यु ही बैठे बैठे

आज सोचा तो आंसू भर आये ,
मुद्दते हो गयी मुस्कुराये ...

हर कदम पे उधर मुडके तो देखा,
उनकी महफ़िल से हम उठ तो आये ...

रह गयी जिन्दगी दर्द बनकर,
दर्द दिल में छुपाये छुपाये ....

दिल की नाजुक रगे टूटते है ,
याद इतना भी कोई न आये ...


इसी मूवी का एक और गाना है,ऊपर वाला चाहे न सुना हो पर ये गाना जरुर  सुना होगा।




Thursday, August 23, 2012

लम्बी छुटटी

पिछले शनिवार लम्बी छुटटी  थी ...
3 दिन की छुट्टी ,  I HATE छुट्टी
कुछ काम नहीं होता करने को, बिना काम किये केसे रह सकते है।
सोच रहा हु जब रेटिएर हो जायेगे तो क्या करेगे ???
पहले वाली hobbies फिर से develop करनी होगी ...
 पेंटिंग,फार्मिंग और दोस्तों के साथ बैठकर ताश  खेलना .....
याद नहीं आ रहा लास्ट टाइम कब दोस्तों के साथ फुर्सत में बैठा था ....
दोस्तों मतलब ग्रुप कम से कम 5-6....
खैर, इस बार विवेक के पास गया था, कोरमंगला पहले सोचा था इमरान के लिए रूम देखेगे , पर उसे फ़ोन किया तो पता चला की वो 30 को आ रहा है, इसलिए रूम देखने का प्रोग्राम कैंसल....
तो यु ही तफरीह करने लगे वही फौरम माल में, बिलियर्ड खेला 1/2-1 घंटे फिर विवेक के रूम पे चले गए।
इस बार बड़े दिनों बाद खुद हाथ से खाना बना के खाया, यहाँ के खाने में वो राजस्थान वाला टेस्ट नहीं, पर खुद के हाथ का बनाया खाना मस्त था...
आज पहले दिन के लिए इतना ही...
आगे देखेते है ये ब्लॉग कहा तक जाता है, पिछला ब्लोग्ग तो बंद ही पड़ा है कई दिनों से जिसमे iPhone की programming के टिप्स लिखता था।..
अभी सेकंड हैण्ड MACBOOK लेने की सोच रहा हु, जब ले लूँगा तब फिर से पुराने ब्लॉग पे पोस्ट करुगा...
इन्शा -अल्लाह आमीन ....








  
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